पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन–3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से लगभग 120 वैज्ञानिकों के इस्तीफा देने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है।
परिचय
- वर्षों से वैज्ञानिकों के इस्तीफे होते रहे हैं, किंतु हाल के समय में बड़ी संख्या में हुए इस्तीफों ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि भारत के प्रतिभाशाली वैज्ञानिक संगठन क्यों छोड़ रहे हैं।
- ऐसे ही मामले वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की प्रयोगशालाओं तथा अन्य सरकारी वित्तपोषित अनुसंधान संस्थानों में भी देखे गए हैं।
- प्रतिभा पलायन (Brain Drain) से तात्पर्य उच्च शिक्षित एवं अत्यधिक कुशल व्यक्तियों का बेहतर अवसरों की तलाश में एक देश से दूसरे देश में प्रवास करना है।
- भारत से इंजीनियर, चिकित्सक, वैज्ञानिक, सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ तथा शिक्षाविद् मुख्यतः संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों की ओर जाते हैं।
- 2015 से 2022 के बीच लगभग 13 लाख भारतीय देश छोड़कर गए, जिनमें बड़ी संख्या उच्च शिक्षित पेशेवरों की थी।
- प्रमुख गंतव्य: संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा तथा यूरोप कुशल भारतीय पेशेवरों के प्रमुख गंतव्य बने हुए हैं।
संभावित कारण
- कठोर पदानुक्रम: भारत की अनेक प्रयोगशालाएँ आज भी कठोर पदानुक्रम पर आधारित व्यवस्था में कार्य करती हैं, जो विश्व के अग्रणी वैज्ञानिक संस्थानों की कार्य संस्कृति से भिन्न है।
- नौकरशाही संस्कृति: भारत के अनेक वैज्ञानिक सम्मेलनों में शैक्षणिक वातावरण की अपेक्षा नौकरशाही संस्कृति अधिक दिखाई देती है। विशिष्ट वक्ताओं को विशेष पहचान-पत्र एवं विशेष आतिथ्य मिलता है, जबकि विद्यार्थियों एवं कनिष्ठ प्रतिभागियों के साथ अलग श्रेणी जैसा व्यवहार किया जाता है।
- निजी क्षेत्र की ओर रुझान: शोधकर्ता निजी अनुसंधान संस्थानों, उभरती गहन-प्रौद्योगिकी (Deep-Tech) कंपनियों, विदेशी विश्वविद्यालयों तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग वाले संस्थानों की ओर जा रहे हैं, जहाँ प्रशासनिक प्रतिबंधों की तुलना में वैज्ञानिक स्वायत्तता अधिक होती है।
- अनुसंधान एवं विकास पर कम व्यय: भारत का अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय (GERD) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 0.6% से 0.7% के बीच बना हुआ है, जो वैश्विक औसत तथा चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों की तुलना में कम है।
- भारत में निजी क्षेत्र का योगदान केवल लगभग 36% है, जबकि उपर्युक्त देशों में यह 70% से अधिक है।
- आर्थिक कारण: विकसित देशों की तुलना में कम वेतन तथा अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले व्यक्तियों के लिए सीमित रोजगार अवसर।
- शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसर:विश्वस्तरीय अनुसंधान अवसंरचना तक सीमित पहुँच,विदेशों में बेहतर प्रशिक्षण, व्यापक अनुभव तथा अधिक कैरियर उन्नति के अवसर एवं उच्च शिक्षा एवं उन्नत उपाधियों के लिए विदेशी संस्थानों को प्राथमिकता।
- जीवन शैली एवं जीवन की गुणवत्ता: विदेशों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, आधारभूत संरचना एवं जीवन स्तर उपलब्ध है। साथ ही वैश्विक पहचान एवं अंतरराष्ट्रीय संपर्क स्थापित करने के अधिक अवसर मिलते हैं।
सरकारी पहलें
- अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) योजना: 1 लाख करोड़ रुपये के कोष के साथ स्वीकृत इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास तथा गहन-प्रौद्योगिकी नवउद्यमों को प्रोत्साहित करना है।
- इसके अंतर्गत दीर्घकालिक, कम या शून्य ब्याज वाले ऋण, इक्विटी निवेश तथा अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के माध्यम से एक नए गहन-प्रौद्योगिकी कोषों के कोष (Deep-Tech Fund of Funds) का प्रावधान किया गया है।
- अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF): वर्ष 2023 में स्थापित यह संस्था विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता के लिए उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करती है।
- इसका लक्ष्य 2023–28 के दौरान 50,000 करोड़ रुपये विभिन्न स्रोतों—ANRF कोष, नवाचार कोष, विज्ञान एवं अभियांत्रिकी अनुसंधान कोष तथा विशेष प्रयोजन कोष—के माध्यम से जुटाना है।
- राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति, 2022: इसका उद्देश्य वर्ष 2035 तक भारत को भू-स्थानिक क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाना है।
- यह नीति भू-स्थानिक आँकड़ों तक पहुँच को उदार बनाते हुए शासन, व्यापार एवं अनुसंधान में उनके उपयोग को प्रोत्साहित करती है।
- भारतीय अंतरिक्ष नीति, 2023: यह वर्ष 2020 के अंतरिक्ष सुधारों पर आधारित है, जिनके माध्यम से गैर-सरकारी संस्थाओं को अंतरिक्ष क्षेत्र में पूर्ण भागीदारी का अवसर दिया गया।
- इसका उद्देश्य अंतरिक्ष क्षमताओं का विस्तार, व्यावसायिक अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ावा देना तथा सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना है।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: वर्ष 2023–31 के लिए 6,003.65 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, ताकि वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से क्वांटम प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाया जा सके।
- बायोE3 नीति, 2024: यह जैव-विनिर्माण एवं जैव-कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Bio-AI) केंद्रों तथा राष्ट्रीय जैव-निर्माणशाला (Biofoundry) नेटवर्क की स्थापना को प्रोत्साहित करती है, जिससे प्रौद्योगिकी विकास एवं व्यावसायीकरण को गति मिले।
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): वर्ष 2015 में प्रारंभ इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं सरकारी एजेंसियों को राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क से जुड़े अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटिंग तंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): वर्ष 2021 में स्थापित इस मिशन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले विनिर्माण का सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
- भारत ने पहले ही छह राज्यों में 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिनमें ओडिशा की पहली वाणिज्यिक सिलिकॉन कार्बाइड निर्माण इकाई भी शामिल है।
- भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिशन (IndiaAI Mission): यह “भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास और भारत के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग” की परिकल्पना पर आधारित है।
- मिशन ने अपनी प्रारंभिक 10,000 GPU क्षमता के लक्ष्य को बढ़ाकर 38,000 GPU कर दिया है, जिससे नवउद्यमों, शोधकर्ताओं एवं उद्योगों के लिए सुलभ कृत्रिम बुद्धिमत्ता अवसंरचना उपलब्ध हो रही है।
- अटल नवाचार मिशन (AIM): विद्यार्थियों, नवउद्यमों एवं उद्यमियों को सहयोग देकर जमीनी स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखता है।
निष्कर्ष
- भारत को वैज्ञानिक संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ानी चाहिए तथा शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी एवं सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए।
- केवल प्रतिभाओं को वापस लाना पर्याप्त नहीं है; भारत को ऐसा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा जहाँ उत्कृष्ट प्रतिभाएँ मजबूत संस्थागत व्यवस्था, शैक्षणिक स्वायत्तता, पर्याप्त वित्तपोषण तथा स्वतंत्र विचार-विमर्श के वातावरण में फल-फूल सकें।
स्रोत: TH
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